क्या है तिथि || Understanding Tithi in Hindi.

राम नवमी, श्रीकृष्ण जन्म अष्टमी, नाग पंचमी, विजय दशमी, पितृ अमावस्या, कार्तिक पूर्णिमा - इन सभी नामों से हर भारतीय परिचित होता है। इनमें आने वाले शब्द नवमी, अष्टमी, पंचमी आदि क्या हैं! इस पर विचार करते हैं।

तिथि का अर्थ

तिथि शब्द हम सबने कभी ना कभी सुना ही होगा। अतिथि = अ + तिथि = जिसके आने की कोई तिथि ना हो! तिथि का सरल सा अर्थ है तारीख (वैसे ये अर्थ नहीं है, पर समझने के लिए हम इसे तारीख मान सकते हैं)

हिन्दू कैलेंडर जिसे पंचांग कहा जाता है, उसमें तिथि एक अंग है।
पंचांग = पंच + अंग (Five Limbs)

महीने की तीस तिथि

तिथि को थोड़ा अधिक समझने की कोशिश करते हैं। हम जानते हैं पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूम रही है और चन्द्रमा पृथ्वी का चक्कर लगा रहा है। नीचे दिए गए डायग्राम में इसे आसान तरीके से दिखाने की मैंने कोशिश की है।

 

जैसा कि चित्र में देख सकते हैं, जब चन्द्रमा सूर्य की तरफ बढ़ता है तो मानो एक एक कदम चल रहा होता है।
चन्द्रमा के तीस कदम ही तीस तिथियां है। जिसमें पंद्रह कदम होते हैं तब के जब चन्द्रमा सूर्य की तरफ जा रहा होता है जिसे कृष्ण पक्ष या अंधेरा पाक कहा जाता है। इसी तरह जब चन्द्रमा सूर्य से दूर जा रहा होता है उसे शुक्ल पक्ष या उजाला पाक कहा जाता है। जब चन्द्रमा सूर्य व पृथ्वी के बिलकुल बीच में आ जाता है, उसे अमावस्या कहा जाता है और जब पृथ्वी के दूसरी तरफ होता है तो पूर्णिमा।

तो पंद्रह तिथि शुक्ल पक्ष में होती हैं ( १, २,३ -- १४ और पूर्णिमा) और पंद्रह तिथि कृष्ण पक्ष में होती हैं (१, २, ३ -- १४ और अमावस्या)

पहली तिथि से लेकर चौदहवीं तिथि को संस्कृत नामों से जाना जाता है जैसे प्रतिपदा अर्थात पहली तिथि, द्वितीया अर्थात दूसरी तिथि आदि।

अंग्रेजी तारीख व तिथि में फर्क

हमने समझा कि तिथि का मतलब है चन्द्रमा का एक कदम। पर चूंकि चन्द्रमा की गति या रफ़्तार एक सी नहीं रहती, इसलिए एक तिथि उन्नीस घंटे से लेकर चौबीस घंटे तक की हो सकती है।

एक सूर्योदय से लेकर दुसरे सूर्योदय तक एक सौर दिन माना जाता है। पर उस अवधि या समय में हो सकता है कि एक से ज़्यादा तिथि पड़े, इसलिए किसी भी दिन की तिथि का निर्धारण करने के लिए एक नियम है।

वह नियम है कि सूर्योदय के समय जो तिथि हो वही पूरे दिन की तिथि मानी जाती है।

कुछ और बातें

भारतीय पंचांग अपने आपमें एक अद्भुत विषय है। हमारे प्राचीन ऋषियों ने किस प्रकार बिना किसी दूरबीन के ग्रहों, नक्षत्रों की स्थिति समझी व अपनी गणनाएं कीं, यह चमत्कृत व विस्मयित कर देता है। अभी हमने तिथि के बारे में बहुत आसान तरीके से समझा, आगे आने वाले समय में हम पंचांग के बारे में और भी बातें जानेंगे।