श्री श्री रवि शंकर कोट्स [Sri Sri Ravi Shankar Quotes in Hindi]

श्री श्री रवि शंकर कोट #1

हमेशा आराम की चाहत में , तुम आलसी हो जाते हो. हमेशा पूर्णता की चाहत में तुम क्रोधित हो जाते हो.हमेशा अमीर बनने की चाहत में तुम लालची हो जाते हो.

श्री श्री रवि शंकर कोट #2

प्रेम कोई भावना नहीं हैं। प्रेम तुम्हारा अस्तित्व हैं

श्री श्री रवि शंकर कोट #3

सब कुछ खुशी से करो। चलना, बात करना, बैठना, सब कुछ ख़ुशी से ; भले ही आप किसी के खिलाफ शिकायत क्यों न करें, खुशी से करें।

श्री श्री रवि शंकर कोट #4

जब तुम अपने जीवन को पूजा मानने लगते हो तो प्रकृति तुम्हारी सभी इच्छाओं को पूरा करने लगती है।

श्री श्री रवि शंकर कोट #5

स्वयं को क्षमा करें और दूसरों को क्षमा करें; दूसरों की गलतियों या खुद की गलतियों को चबाते न रहें।

श्री श्री रवि शंकर कोट #6

जीवन बहुत गंभीर होने के लिए कुछ भी नहीं है। जीवन आपके हाथों में खेलने के लिए एक गेंद है। गेंद पर पकड़ नहीं है।

श्री श्री रवि शंकर कोट #7

जीवन आपको सकारात्मक और नकारात्मक दोनों देता है। अच्छे पर ध्यान दें और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ें।

श्री श्री रवि शंकर कोट #8

आपका प्रिय दोस्त आपका दुश्मन बन सकता है और आपका दुश्मन, आपका दोस्त। इसलिए हमेशा खुद पर भरोसा रखें।

श्री श्री रवि शंकर कोट #9

आपको अपने काम और सेवा के बीच संतुलन तलाशना होगा। जीवित रहने के लिए आप काम करते हैं, और संतुष्टि के लिए आप सेवा करते हैं।

श्री श्री रवि शंकर कोट #10

अपनी मुस्कान को सस्ता और गुस्से को महंगा बनायें।

श्री श्री रवि शंकर कोट #11

श्रद्धा यह समझने में है कि आप हमेशा वो पा जाते हैं जिसकी आपकी ज़रुरत होती है |

श्री श्री रवि शंकर कोट #12

हमेशा आराम की चाहत में , तुम आलसी हो जाते हो. हमेशा पूर्णता की चाहत में तुम क्रोधित हो जाते हो.हमेशा अमीर बनने की चाहत में तुम लालची हो जाते हो |

श्री श्री रवि शंकर कोट #13

अपने कार्य के पीछे की मंशा को देखो . अक्सर तुम उस चीज के लिए नहीं जाते जो तुम्हे सच में चाहिए |

श्री श्री रवि शंकर कोट #14

हर एक चीज के पीछे तुम्हारा अहंकार है : मैं , मैं , मैं , मैं . लेकिन सेवा में कोई मैं नहीं है , क्योंकि यह किसी और के लिए करनी होती है |

श्री श्री रवि शंकर कोट #15

दूसरों को आकर्षित करने में काफी उर्जा बर्वाद होती है . और दूसरों को आकर्षित करने की चाहत में – मैं बताता हूँ , विपरीत होता है |

श्री श्री रवि शंकर कोट #16

जब मन अशांत हो, तो गाने- बजाने और भजन करने से मन ठीक हो जाता है|

श्री श्री रवि शंकर कोट #17

चेतना ही शांति है अर्थात आप स्वयं शांति हैं, आप स्वयं सत्य हैं, आप स्वयं ही उर्जा हैं |

श्री श्री रवि शंकर कोट #18

श्रद्धा यह समझने में है कि आप हमेशा वो पा जाते हैं जिसकी आपकी ज़रुरत होती है | 

 

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