शीर्षासन की विधि, लाभ और सावधानी – Shirshasana Benefits and Precautions in Hindi

आज से बीस तीस वर्ष पूर्व 'योग' (Yoga) शब्द का ज़िक्र आते ही सबसे पहली छवि उभरती थी एक ऐसे व्यक्ति की जिसके पैर ऊपर हों तथा सर ज़मीन पर हो। वह ऐसा समय था जब योग को लेकर अनेकानेक भ्रांतियां पश्चिमी देशों में विद्यमान थीं और भारत में तो योग का प्रचलन मात्र एक सीमित अभिजात्य तथा समृद्ध वर्ग तक ही था अथवा तो गिरी कंदराओं या हिमालय में रहने वाले संन्यासियों को ही इसका ज्ञान हुआ करता था।
हर विद्या के पुनरोत्थान का एक समय होता है तथा योग के संदर्भ में वह समय विगत कुछ वर्षों से आ चुका है। पैर ऊपर तथा सर ज़मीन पर, यह जो उल्लेख प्रारम्भ में ही किया गया है, यह हठयोग (hatha yoga) का एक अत्यंत प्रसिद्ध आसन है जिसे 'शीर्षासन' (Shirshasana) के नाम से जाना जाता है।

आइये जानते हैं शीर्षासन क्या है और इसके फायदों के बारे में - What is Shirshasana in Hindi?

आसन (Asana) का अर्थ - What is Asana in Hindi

आसन शब्द को अगर आसान शब्दों में कहें तो वह होगा 'बैठने की एक विशेष स्थिति'। यही कारण है कि पूजा आदि में बैठने के लिए प्रयोग किये जाने वाले कपड़े, दरी अथवा चटाई को भी 'आसन' कहा जाता है। असंख्य आसनों में से शीर्षासन एक प्रमुख आसन है जिसे 'आसनों का राजा' भी कहा जाता है।

शीर्षासन की विधि - How to do Shirshasana in Hindi

शीर्षासन का नाम सुनते ही अधिकांशतः लोग घबरा जाते हैं तथा इसे बहुत कठिन मानते हैं। परंतु वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। थोड़े से अभ्यास व सावधानी के साथ कुछ दिन निरंतर करते रहने से ही शीर्षासन सीखा जा सकता है। हाँ, यह अवश्य है कि किसी योग्य योगाचार्य के निर्देशन में इसे किया जाए तो कोई भी हानि होने की संभावना न्यूनतम होगी।

विधि - Method
1. सर्वप्रथम वज्रासन में अपने योगा मैट पर बैठ जाएं।
2. अब अपने दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में गूंथकर (इंटरलॉक) अपने आगे रखें।
3. अब अपने सर को दोनों हाथों की अंगुलियों के बीच में रखकर दोनों पैरों को सीधा करें।
4. इसी अवस्था में रहते हुए धीरे धीरे कदम आगे बढ़ाएं और जब और अधिक आगे जाने की संभावना ना रहे, तो धीरे से दोनों पैर व नितंब ऊपर आसमान की तरफ उठाएं। प्रारम्भ में कुछ दिन इसी अवस्था तक शरीर को संतुलित करें।
5. जब इस अवस्था में संतुलन बनने लगे, तो धीरे से पैरों को सीधा करने का प्रयास करें तथा बीस से तीस सेकंड आसन में रुकें।

[caption id="attachment_319" align="aligncenter" width="135"]Sheershasana Image Source: holistic-online.com[/caption]

शीर्षासन कितनी देर करें - Shirshasana Duration
जब तीस सेकंड तक शीर्षासन करना सहज हो जाये, तो प्रतिदिन पांच सेकंड की अवधि इसमें जोड़ते हुए छह दिनों में एक मिनट तक पहुंचें। फिर अगले एक सप्ताह एक मिनट प्रतिदिन शीर्षासन का अभ्यास करते रहें। उसके अगले सप्ताह फिर नित्य पांच सेकंड का अभ्यास बढ़ाते हुए डेढ़ मिनट तक पहुंचे तथा आने वाले सप्ताह में डेढ़ मिनट इसका अभ्यास करें। इस प्रकार क्रमशः समय बढ़ाते हुए बीस से तीस मिनट के अभ्यास तक पहुंचना सर्वोत्तम है।

यहां कुछ लोगों को शंका हो सकती है कि इस प्रकार तो एक महीने में एक मिनट ही हमारे शीर्षासन की अवधि में जुड़ पायेगा, तो बीस मिनट तक पहुंचने के लिए तो बीस महीने अर्थात करीब डेढ़ साल लग जायेगा। यहां ध्यान रखने की बात यह है कि हठयोग का अभ्यास सतत परिश्रम तथा सावधानी का विषय है। अतः किसी भी आसन की अवधि धीरे धीरे बढ़ाना ही उचित है।

शीर्षासन किस समय करें - Shirshasana Time
कोई भी आसन अथवा योग का अभ्यास करने के लिए सर्वोत्तम समय प्रातः काल का ही माना गया है। सुबह चार से छह बजे के बीच वातावरण शांत होता है तथा इस समय किया गया आसन अधिक लाभ देता है। परंतु अगर इस समय ना कर पाएं तो जिस भी समय उठें तो शौच आदि से निवृत्त होकर शीर्षासन का अभ्यास करें। अगर शाम को आप इसका अभ्यास करना चाहते हैं तो ध्यान रखें कि अभ्यास से ढाई तीन घंटे पूर्व ही आपने कुछ खाया हो, उसके बाद नहीं।

शीर्षासन के बारे में भ्रांतियां - Shirshasana Myths in Hindi

1. महिलाओं को शीर्षासन नहीं करना चाहिए
यह सर्वथा निर्मूल भ्रांति है। महिलाएं पुरुषों की भांति ही शीर्षासन कर सकती हैं। हाँ, मासिक धर्म व गर्भावस्था के दौरान स्त्रियों के लिए यह आसन वर्जित है। इस प्रतिबंध का कारण कोई धार्मिक अंधविश्वास ना होकर उस समय में स्त्रियों की शारीरिक अवस्था की रक्षा करना ही है।

2. शीर्षासन केवल संन्यासियों के लिए है, गृहस्थ के लिये नहीं
एक वयोवृद्ध सौ वर्ष से अधिक आयु के योगी से जब मैंने यह प्रश्न पूछा तो उन्होंने कहा था कि हालांकि यह सत्य है कि अति कामुक व्यक्ति के लिए शीर्षासन नहीं है। अगर अत्यधिक मैथुन रत व्यक्ति शीर्षासन ज़्यादा अवधि तक करेगा तो उसके मस्तिष्क को क्षति पहुंचने की संभावना रहेगी। परंतु साथ ही साथ यह भी सत्य है कि संतुलित जीवन जीने वाला गृहस्थ भी शीर्षासन का लाभ ले सकता है। परंतु जैसा पहले भी कहा गया है, आसन की अवधि धीरे धीरे ही बढ़ाई जाए तथा अभ्यास में अति ना हो। 'अति सर्वत्र वर्जयेत'। योग के विषय में भी यह उक्ति नितांत सत्य है।

3. शीर्षासन का अभ्यास पचास की आयु के बाद नहीं प्रारंभ करना चाहिए
योग के प्राचीन ग्रंथ कहते हैं कि हठयोग का अभ्यास युवावस्था में, वृद्धावस्था में, बीमारी में, दुर्बलता में अर्थात किसी भी अवस्था में प्रारंभ किया जा सकता है। अतः पचास के बाद भी निःसंदेह शीर्षासन किया जा सकता है तथा ऐसे कितने ही उदाहरण मैंने प्रत्यक्ष देखें हैं। हाँ, अगर पचास से पूर्व कभी भी योगाभ्यास ना किया हो तो किसी कुशल योगाचार्य के मार्गदर्शन में ही आसनों का अभ्यास प्रारम्भ करना उचित है।

शीर्षासन के लाभ - Shirshasana Benefits in Hindi

1. नियमित अभ्यास से देह पुष्ट, सुदृढ़ व सशक्त होती है।
2. रक्त संचार की गति विपरीत होने से एक प्रकार की ऊर्जा का संचार होता है व कार्यक्षमता बढ़ती है।
3. अवसाद व मानसिक तनाव दूर होता है।
4. नेत्र संबंधी व्याधियां शीर्षासन के नित्य अभ्यास से दूर होती हैं तथा नेत्र दृष्टि बढ़ती है।
5. स्मरण शक्ति बढ़ती है।
6. चेहरे पर प्राकृतिक रूप से निखार बढ़ता है तथा बालों के झड़ने की समस्या में भी लाभ होता है।
7. अगर आप किसी ध्यान साधना का अभ्यास करते हैं तो उससे पूर्व शीर्षासन का अभ्यास एकाग्र होने में सहायता करता है।
8. स्त्रियों के गर्भाशय संबंधी रोगों में भी लाभ होता है।

आसनों के इस राजा का महत्व तो इसके अभ्यास के बाद ही समझा जा सकता है। ऊपर लिखें लाभों के अतिरिक्त भी अन्य अनेक लाभ होते हैं जिन्हें आप स्वयं शीर्षासन के अभ्यास से अनुभव कर सकते हैं।

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