कोरोना की वजह से होने वाले अनुभवों से लीजिये ये शिक्षा [Learnings From Experiences in the times of Corona in Hindi]

'जीवन कितना कीमती है' - कोरोना के आने से पहले हमने ज़्यादा गौर से नहीं सोचा था।

अंदर बाहर जाती एक एक श्वांस, स्वस्थ शरीर, साफ हवा, बाहर घूमने की आज़ादी - ये सभी कुदरत के, देश के ऐसे उपहार हैं जो हमें मिले हुए हैं।

अक्सर हम छोटी छोटी चीज़ों में उलझकर रह जाते हैं। इसने ये किया, उसने वो कहा, पर अगर आज आँख खोलकर देखें तो ये चीज़ें मैटर ही नहीं करतीं। जो मैटर करता है वो है हमारा छोटा या बड़ा परिवार, हमारी घर की किचन, दरवाज़े पर आवाज़ लगाता हुआ वो सब्जी वाला और हमारे होंठों पर एक छोटी सी प्रार्थना, ये जल्द से जल्द ठीक हो!ये भी बीत जाएगा! इसमें कोई संशय नहीं। पर कोरोना ने दस्तक देकर, दस्तक ही नहीं हमारे देश में घुसकर हमें बहुत कुछ सिखाया है।

जीवन का महत्व

हम अक्सर सोचते हैं- जीवन में क्या महत्वपूर्ण है। पर क्या हमने सोचा- जीवन ही महत्वपूर्ण है।जीवन है तो सब कुछ है। जान है तो जहान है। ये जीवन हमें मिला है, ये एक उपहार है। प्रकृति का, परमात्मा का या किसी अज्ञात रहस्य्मयी शक्ति का! ये अद्भुत प्रसाद है।दिल धड़क रहा है, आँखें देख पा रही हैं, कान सुन रहे हैं, हम ज़िंदा हैं!!!!!!!! क्या ये एक अच्छी खबर नहीं?तो आइये, साथ मिलकर ये संकल्प लें कि हम इस जीवन का महत्व समझेंगे।
तुलसीदास जी कहते हैं- अब लौं नसानी अब ना नसैहों ! अभी तक बहुत समय वेस्ट किया, पर अब और वेस्ट नहीं! अब अपनी आयु का और नाश नहीं!

कैसे बनाएं जीवन को सुन्दर

आज हमारी थाली में भोजन है, तन पर वस्त्र हैं, ज़रुरत का सामन ऐसी स्थिति में भी उपलब्ध है। सबसे पहले तो धन्यवाद के भाव से मन को भरें।जब हम प्रकृति की उदारता को महसूस करते हैं, हम धन्यवाद से, शुक्र से भर जाते हैं।जीज़स का एक बड़ा प्यारा वचन है- जिनके पास है उन्हें और दिया जाएगा, जिनके पास कुछ नहीं है, उनसे उनका बचा कुचा भी ले लिया जाएगा। बड़ा गहरा वचन है।

इसका अर्थ यही है कि जिनके जीवन में धन्यवाद है, कृतज्ञता है, उन्हें प्रकृति से और अधिक मिलेगा, जिनके जीवन में शिकायतें हैं, उनसे उनके पास जो है, वो भी ले लिया जाएगा।तो हम धन्यवादी होएं। निश्चित मानिये, जीवन और सुन्दर लगेगा।

दूसरा, प्राणायाम, आसन, योग को अपने जीवन में शामिल करें।थोड़ी स्ट्रेचिंग, श्वांस की क्रियाएं आप आसानी से कर सकते हैं। ज़रूर करें।

अपनी ही श्वांस से, अपने शरीर से परिचय करें। जीवन की सुंदरता में ये चार चाँद लगाएगा।अपने मित्रों से बात करें। जिनसे अनेक वर्षों से संपर्क नहीं हुआ है, या किसी से नाराज़गी है, कॉल लगाएं। हाल चाल पूछें। निश्चित मानिये, दूसरा व्यक्ति आपसे अच्छे से ही बात करेगा। Break the Ice! पहले कौन? इसी चक्कर में लोगों की उम्र बीत जाती है।अपने माता पिता को धन्यवाद दें। मन ही मन उनके प्रति कृतज्ञ होएं। अपने सभी पूर्वजों का स्मरण कर उन्हें मानसिक अभिवादन दें।

इस संसार में सकारात्मकता की लहरें फैलने की आवश्यकता है। और वो कौन फैलाएगा? क्यों ना आप और मैं शुरू करें?

है अँधेरी रात पर दीपक जलाना कब मना है!

एक छोटी सी हवन विधि

यज्ञ का इतना अधिक महत्व हमारे ऋषियों ने बताया है। वास्तव में हमें ये रोज़ ही करना चाहिए। एक आसान सा यज्ञ है जो हम सभी कर सकते हैं।एक छोटे से बर्तन में या किसी दीपक में दो चार दाने गूगल (बाज़ार में आसानी से मिल जाता है) के डालें, दो लौंग, अगर मिल सके तो ज़रा सी हवन सामग्री भी, दो चार बूँदें घी की और कपूर डाल कर जलाएं। दस मिनट के लिए इसी के वातावरण में बैठकर गहरी सांस लें। चाहें तो कोई रिलैक्सिंग सॉफ्ट म्यूज़िक या कोई चैंट्स जैसे गायत्री मन्त्र या महामृत्युंजय मन्त्र बैकग्राउंड में प्ले करें। दस मिनट बैठें और अपने व् अपने परिवार के स्वास्थ्य के लिए, पूरे संसार के कल्याण की कामना मन में करें।सूर्यास्त के समय करें तो और अच्छा!

एक और बात

देखिये, कोरोना तो जाएगा ही। जो आया है सो जाएगा। पर हम इससे कुछ सीखें, अपने जीवन में अच्छे परिवर्तन लाएं, जो चले गए उनको श्रद्धांजलि अर्पित करें और अपने सभी डॉक्टर्स, पुलिस फोर्स, बैंक कर्मी, वार्ड बॉयज, नर्सेस, अपनी सरकार व सभी के प्रति शुभ भावना रखें! शायद यही सिखाने के लिए शिक्षक बनकर ये वायरस आया है।

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