क्या है ब्रह्माकुमारी संस्था || Interview of a Brahmakumari Sister in Hindi.

श्वेत वस्त्रधारी ब्रह्माकुमारी बहनें अक्सर हमें दिखती हैं। ये लोग कौन हैं, क्या कार्य कर रहे हैं, इनकी क्या विचारधारा अथवा फिलॉसफी है, ये प्रश्न शायद हममें से बहुत लोगों को आये होंगे। आज अपने ज्ञानसमाधान पाठकों के लिए हम लाएं हैं ऐसी ही एक ब्रह्माकुमारी बहन का इंटरव्यू जिसमें उनकी दिनचर्या, विचारधारा, पृष्टभूमि आदि से सम्बंधित प्रश्नों को जानेंगे उन्हीं के शब्दों में। प्रस्तुत है ब्रह्माकुमारी अर्चना बहन का इंटरव्यू जो "प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय" से लगभग बीस वर्षों से सम्बद्ध हैं -

नमस्कार बीके सिस्टर अर्चना जी

ज्ञानसमाधान टीम की ओर से आपका बहुत बहुत अभिनंदन

बीके अर्चना जी: नमस्कार। ॐ शांति।

ज्ञानसमाधान टीम: सिस्टर, 'प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय'- यह संस्था क्या है, इसके विषय में कुछ बताइये।
बीके अर्चना जी:
यह एक आध्यात्मिक विश्व विधालय है, जिसका उद्देश्य ईश्वरीय ज्ञान और सहज राजयोग द्वारा वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से ओतप्रोत नये विश्व की स्थापना करना है। जहाँ हम जात पात लिंग भेद, भाषा और धर्मों की सीमा को लांघते वसुधैव कुटुम्बकम की भावना में प्रैक्टिकली सहयोगी बनते हैं।

ज्ञानसमाधान टीम: आप विगत कितने वर्षों से इस संस्था से सम्बद्ध हैं तथा आपका परिचय पहली बार इससे कब हुआ?
बीके अर्चना जी:
मुझे इस संस्था का परिचय 19 वर्ष पहले अपने ही एक पड़ोसी भाई के माध्यम से मिला जो वहाँ जाते थे। उस समय मेरी आयु बीस वर्ष थी। मुझे आध्यात्मिकता में रूचि होने के कारण मेरे मन मे इसके विषय में और अधिक जानने की उत्सुकता हुई।

ज्ञानसमाधान टीम: आप अपने जीवन के विषय में तथा संस्था के आध्यात्मिक ज्ञान द्वारा आपमें आये परिवर्तनों के विषय में कुछ बताएं।
बीके अर्चना जी:
मुझे बचपन से ही आध्यात्मिकता मे रुचि थी, भक्ति पूजा पाठ व व्रत आदि करना अच्छा लगता था। लेकिन ये सब करते मन में बहुत सारे प्रश्न उठते थे।

जैसे कि ईश्वर कौन है? यदि देवी देेवता ही भगवान हैं तो उनको शास्त्रों में लड़ते झगड़ते क्यों दिखाया गया है? आत्मा को अगर मोक्ष मिल जाए तो उसका अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा उससे क़्या फायदा कि हम सृष्टि पर ही न आयें। इस प्रकार के अनेक प्रश्न उठते।

यहाँ आने पर मुझे मेरे सब प्रश्नों का हल मिला जिनसे मैं पूर्णतया सन्तुष्ट हुई।

जब मैं ज्ञान में आई उस समय, मैंने अनुभव किया कि यहाँ पर स्वयं की सत्य पहचान, और परमात्मा का सत्य परिचय मिलने से, राजयोग के अभ्यास ( परमात्मा की याद) से बहुत सारे सकारात्मक परिवर्तन मेरे जीवन में आये। जैसे एकाग्रता का बढना, जिससे कॉलेज टाइम में पहले की अपेक्षा अच्छे मार्क्स आये, आत्मबल बढ़ा, किसी भी नये कार्य को करने के लिए, जीवन में बहुत सकारात्मकता निश्चिंतता ,दृढता आई और जीवन में सच्ची खुशी, शान्ति, आनन्द का अनुभव हुआ। किसी भी परिस्थिति के समय भी कैसे स्थिर, शान्त रहें, यह सब मैंने अनुभव किया।

ज्ञानसमाधान टीम: समाज के निर्माण व उत्थान हेतु आपकी संस्था क्या कार्य करती है, इस विषय में कुछ बताएं।
बीके अर्चना जी:
विश्व भर में किये जाने वाले अनेक प्रयासों के बाबजूद भी व्यक्तिगत और दुनियावी स्तर पर पाप, अत्याचार दुख और अशांति बढती ही जा रही है, क्योंकि मनुष्य आध्यात्मिकता को पूर्णतया भूल चुका है।
यह एक ऐसा विश्व विद्यालय है जहाँ व्यक्ति स्वयं के सत्य स्वरूप को पहचान सकता है, जिसके माध्यम से वह स्वयं को सशक्त व र्निविकारी बना सकता है।

ज्ञानसमाधान टीम: आपने ध्यान की विधि 'राजयोग' का ज़िक्र किया। हमारे ज्ञानसमाधान के पाठकों को इसकी विधि व लाभ के बारे में कुछ बताएं।
बीके अर्चना जी:
राजयोग का अभ्यास( ध्यान विधि) एक बहुत ही सहज प्रक्रिया है जिसमें हम अपने मन बुद्धि को बाहरी भौतिक जगत से हटा कर आन्तरिक आत्मिक स्वरूप में स्थित कर निराकार ज्योतिबिंदु परमात्मा को प्रेम से याद करते हैं। जिससे हम अपने मूल स्वभाव अर्थात पवित्रता, सुख,शान्ति, आनंद की शाश्वत अनूभूति देवत्व प्राप्त कर सकते हैं।

राजयोग के अभ्यास (मेडिटेशन) द्वारा मन की नकारात्मकता दूर होती जाती है, आत्मा सशक्त बनती है ,जिससे हमारे अंदर सुषुप्त शक्तियां जाग्रत होती हैं

और जिससे हम आध्यात्मिक, सामाजिक, आर्थिक, हर प्रकार से विकास कर सकते हैं।

ज्ञानसमाधान टीम: ब्रह्माकुमारी बहनें व भाई अक्सर श्वेत वस्त्र ही पहनते हैं, इसका क्या महत्व है?
बीके अर्चना जी:
श्वेत वस्त्र आन्तरिक स्वच्छता, मन की पवित्रता(शुद्ध विचारों) का प्रतीक है। संसार में मृत्युपरांत डाले जाने वाले श्वेत वस्त्र जो वैराग्यवृति को दर्शाते हैं , जिसे हमें इस संसार में रहते धारण करना है। संसार में रहते हम बुराईयों से वैराग्य रखें तथा अच्छाईयों को धारण करें। श्वेत वस्त्र पर लगा छोटा दाग भी वस्त्र की शोभा को खत्म करता है, जीवन रुपी श्वेत वस्त्र की सदा सम्भाल रखें थोड़ा दाग (बुराई )भी शोभा को खत्म कर सकता। हमें अपने जीवन की संभाल श्वेत वस्त्र की तरह रखनी है।

ज्ञानसमाधान टीम: क्या आप अपनी व ब्रह्माकुमारी बहनों की दिनचर्या के बारे में हमारे पाठकों को कुछ बताना चाहेंगी?
बीके अर्चना जी:
हम सभी प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त 4 बजे उठ राजयोग का अभयास करते जिसे परमात्म मिलन का समय कहा गया है, प्रातः ६ से 8 बजे तक संगठित रूप में ईश्वरीय महावाक्य (परमात्म वाणी) का श्रवण करते हैं, जिसमें पूरा दिन में मन का ध्यान रखने लिए(मन को श्रेष्ठ डायरेक्शन) मिलते हैं। जिससे जीवन सुखद अनुभव होता है।

नुमाशाम 6.30 से 7.30 के समय वातावरण शुद्ध होता है, भक्ति भाव का होता है, उसमें हम संगठित ध्यान करते हैं जिससे आत्मा ऊर्जावान होती जाती है।

ज्ञानसमाधान टीम: हमारे ज्ञानसमाधान के पाठकों के लिए कुछ संदेश?
बीके अर्चना जी:
आप सभी पाठकों के लिए हमारा शुभ संदेश है वर्तमान समय एवं आने वाले समय में हमें आध्यात्मिकता की बहुत आवश्यकता है, सबसे बड़ा अविनाशी सहारा है परमात्मा । वर्तमान समय हमें ईशारा कर रहा है हम स्वयं को परमात्मा से जोडकर रखें उसे हर कार्य में साथ रखें जिससे हम शक्तिशाली रह आत्मविश्वास के साथ हर परिस्थिति का सामना कर सकें और सभी को यही प्रेरणा दें। आप सभी ज्ञान समाधान पाठकों को हमारी शुभकामनाएँ है आप सदा अध्यात्म द्वारा आत्मिक, सामाजिक, आर्थिक, उन्नति कर आध्यात्मिक बुलंदियों को छुएं। ज्ञान समाधान टीम??? के लिये हमारी शुभकामनाएँ है आप के माध्यम से हर आत्मा सशक्त बने। ज्ञान समाधान टीम एवं पाठकों को सेवा का अवसर देने लिये आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद।

ज्ञानसमाधान के लिए समय निकालने हेतु आपका बहुत बहुत आभार। हम आशा करते हैं कि ब्रह्माकुमारी संस्था के माध्यम से समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन आएगा। धन्यवाद।