कीमती जीवन कीमती हम

जीवन हम सबको मिला है और सभी जी भी रहे हैं। पर इस जीवन में सबसे इम्पोर्टेन्ट क्या है? वह क्या चीज़ है जो सबके जीवन में सबसे अधिक महत्व रखती है? इस प्रश्न के उत्तर में कोई कहेगा पैसा सबसे ज़रूरी है कोई कहेगा सेहत ज़रूरी है कोई कहेगा ख़ुशी सबसे ज़रूरी है। पर एक चीज़ है जो इन सबसे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है, वह है 'जीवन'! इस जीवन में सबसे महत्वपूर्ण यह जीवन ही है! कहा भी जाता है कि जान है तो जहान है।  

जीवन में ज़रूरी चीज़

जीवन महत्वपूर्ण है, यह सच है।  पर उस जीवन के अंदर भी कुछ चीज़ें हैं जो हर किसी की ज़रुरत हैं।  और उन ज़रूरी चीज़ों की एक लिस्ट यदि बनाई जाये, तो पूरे विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि सबसे ज़रूरी वस्तु हर किसी के जीवन में है- 'सेहत'।  सेहत एक ऐसा खजाना है जिसकी कीमत उसे खोने के बाद ही पता चलती है।  तो क्या यह हर इंसान की पहली प्रायोरिटी नहीं होनी चाहिए?

समय नहीं है जी

हम लोग ज़्यादातर, पढ़े लिखे हैं, बुद्धिमान हैं, समझते भी हैं कि सेहत का जीवन में बहुत बड़ा रोल है।  पर जहाँ बात तंदुरुस्ती के लिए कुछ समय देने की आती है, हम कहते हैं हमारे पास समय ही नहीं है। किसी भी रिश्ते को अगर चलाना है तो उसे समय देना ज़रूरी है।  अगर आप सामने वाले व्यक्ति को समय नहीं देंगे तो क्या उसके साथ आपका रिश्ता टिक पायेगा? नहीं! इसी तरह सेहत के साथ यदि हम अपना रिश्ता बरकरार रखना चाहते हैं तो इसको भी कुछ समय तो देना ही होगा।  चौबीस घंटे में से कितना समय हम अपनी सेहत के लिए देते हैं? यह सवाल हमें खुद से ही करने की ज़रुरत है।  

कैसे कर सकते हैं शुरुआत

आज के समय में खुद पर ध्यान देने के लिए इतने ऑप्शन्स मौजूद हैं जो पुराने समय में नहीं थे।  आप घर पर ही योग आसन, प्राणायाम कर सकते हैं, जॉगिंग कर सकते हैं, ब्रिस्क वाकिंग या तेइ से टहल सकते हैं, स्विमिंग, जिम सब कुछ तो है।  केवल पंद्रह मिनट से शुरुआत करें।  रोज़ पंद्रह मिनट भी अगर हम अपने को नहीं दे सकते, तो फिर जीवन है ही किसलिए! वास्तव में केवल पंद्रह मिनट से ही हमें अच्छी सेहत मिल जाए, यह ज़रूरी नहीं! पर एक शुरुआत तो करें!

स्वास्थ्य की कीमत समझें

'पहला सुख निरोगी काया'- हम सबने ही ये सुना है।  किसी भी अस्पताल में जाकर हम थोड़ा वक्त गुज़ारें तो हम थोड़ा अंदाजा लगा सकते हैं कि अच्छे स्वस्थ शरीर का क्या महत्व है! भगवान बुद्ध के पास कोई भी भिक्षुक होने आता था तो वे उसे कहते थे कि पहले जाओ और छह महीने शमशान में गुज़ारो! इससे स्वतः ही शरीर की क्षणभंगुरता समझ में आएगी।  इसी तरह यदि हम कुछ समय भी अस्पताल का एक चक्कर लगा कर आएं तो हम समझ सकते हैं कि सेहत पर ध्यान ना देने के परिणाम क्या हो सकते हैं!

हो सके तो ऐसे मित्रों का ग्रुप बनाएं जो इस बात के लिए जागरूक हों! जैसे युवा लोग अपने मित्रों को कहते हैं कि चल यार एक कश लगाकर आते हैं, इस तरह यदि कोई मित्र ऐसा हो जो कहे, चल यार, पांच दस राउंड ग्राउंड में भागकर आते हैं, या साथ में सूर्य नमस्कार करते हैं, क्या हम इस तरह का अपना जीवन नहीं बना सकते?

जीवन में एक नया उत्साह लाएं

रोज़ कुछ अच्छा पढ़ें, उसे जीवन में अप्लाई करें और धीरे धीरे जानें कि इस शरीर से भी परे कुछ है और उस अमर तत्व को कोई बीमारी, कोई दुःख नहीं छू सकता।  मस्त होकर गायें, भले ही गाना आये या ना आये! ऐसे ही दोस्तों का ग्रुप बनाएं जो जीवन की कीमत को समझें! इसी को ही सत्संग कहा जाता है।  सत्संग का मतलब यह नहीं है कि जीवन से थके हारे निराश वृद्ध लोग उदास बैठकर भगवान् को याद कर रहे हैं। सत्संग का अर्थ है उत्साह, जहाँ जिस हाल में हम हैं, उससे थोड़ा ऊँचा उठने का प्रयास!

हम कोशिश तो करें, उसके बाद भी अगर प्रारब्धवश कोई बीमारी है, तकलीफ है, तो उसके लिए डॉक्टर्स हैं, दवाइयां हैं!  संसार में पैसा कमा कमा कर और उसको बैंक लॉकर में छोड़ जानें के लिए हम बिलकुल यहां नहीं आये हैं! ये तो पक्का मन में निश्चय कर लेना चाहिए! तो जब अवसर लगे, कहीं घूमें, पर्वतों की सैर करें, नदियों के किनारे जाकर बैठें, मन को खुश रखें!

सैर कर दुनिया की गाफिल ज़िंदगानी फिर कहाँ

ज़िंदगानी गर रही तो जवानी फिर कहाँ