पर्यावरण को बचाने के उपाय / छोटे कदम – How to Protect Environment in Hindi

पर्यावरण है हम सबकी जान, पेड़ लगाओ, जग स्वच्छ बनाओ,करो इसका सम्मान
इसलिए हम सबका है एक ही नारा, स्वच्छ सुंदर हो विश्व हमारा।

मको पर्यावरण को बचाने के बारे में विचार करने से पहिले यह जानना आवश्यक है कि पर्यावरण क्या है?
पर्यावरण शब्द दो शब्दों से मिल कर बना है,”परि”जो हमारे चारों ओर है,”आवरण”जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है। पर्यावरण का असली अर्थ है वह सभी प्राकृतिक परिवेश जैसे कि भूमि, वायु, जल, पौधें, पशु, ठोस सामग्री, कचरा, धूप, जंगल और अन्य वस्तु।

इन सभी परिवेशों के साथ स्वस्थ वातावरण और प्रकृति को आपस में संतुलन को बनाए रखना है और साथ ही साथ पृथ्वी पर सभी जीवित चीजों को आगे बढ़ने, पोषित और विकसित करने में मदद करना है।

पर्यावरण को दूषित या असंतुलित करना

आज के समय में पर्यावरण असंतुलित की सबसे बड़ी समस्या ग्लोवल वार्मिंग की है जिसकी वजह से पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है और मानव जीवन के कदम विनाश की ओर बढ़ते ही जा रहे हैं । पृथ्वी पर वातावरण दिन पर दिन दूषित होता जा रहा है।कहीं अत्याधिक सरदी पड़ रही है और कहीं अत्याधिक गर्मी। न केवल मनुष्य को बल्कि सभी जीवधारियों को भी भिन्न -भिन्न प्रकार की बीमारियों का भी सामना करना पड़ रहा है।

पर्यावरण को बचाने के उपाय - How to Save our Environment in Hindi

भूमि प्रदूषण - Soil Pollution in Hindi

जनसख्या वृद्धि - Increase in Population

पर्यावरण को प्रदूषित करने में जनसख्या वृद्धि का बहुत बड़ा हाथ है। तेजी से बढती हुई जनसख्या ने शहरीकरण और औधोगीकरण की प्रवर्ति को बढ़ावा दिया है।शहरों में अत्याधिक आबादी होने के कारण फ्लैट निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाये जा रहे है ताकि अधिक से अधिक परिवार उनमें रह सकें ।अधिक परिवारों ने पानी की आवश्यकता को बढ़ा दिया है।पानी की कमी को पूरा करने के लिए गहरे समर्सिबल लगाये जा रहे हैं जिससे पानी का स्तर काफी गिरता जा रहा है।आज हमें चिपको आन्दोलन, जंगल बचाओ आन्दोलन, नर्मदा बचाओ आन्दोलन, नवदान्य आन्दोलन, साइलेंट वैली आन्दोलन जैसे और कई आन्दोलनों की भी ज़रूरत है जिससे लोगों में जागरूकता लाई जाये । इसलिए विकास के साथ साथ विनाश से बचने के लिए पर्यावरण संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है। प्लास्टिक के पदार्थों का अधिक मात्रा में उपयोग करना जो जमीन में दब कर भी नहीं गलती और बिजली का अधिक मात्रा में उपयोग भूमि प्रदूषण को बढाता है।भूमि प्रदूषण से कृषि योग्य भूमि की कमी हो जाती है।

जल प्रदूषण - Water Pollution in Hindi

जल पर्यावरण का एक अभिन्न अंग है एव मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताओं में से एक है। जल की अनुपस्थित में मानव कुछ दिन ही जिन्दा रह पाता है क्योंकि मानव शरीर का एक बड़ा हिस्सा जल होता है। अतः स्वच्छ जल के अभाव में किसी प्राणी के जीवन की क्या, किसी सभ्यता की कल्पना, नहीं की जा सकती है।
जनसंख्या वृद्धि और औद्योगीकरण आदि ने हमारे जल स्रोतों को प्रदूषित किया है जिसके कारण हमारी पवित्र पावन गंगा नदी जिसका जल कई वर्षों तक रखने पर भी स्वच्छ व निर्मल रहता था , आज यही पावन नदी गंगा प्रदूषित हो गई है।
गंगा के साथ साथ कई नदियाँ व जल स्रोत भी प्रदूषित हो रहे हैं। यदि हमें मानव सभ्यता को जल प्रदूषण के खतरों से बचाना है तो इस प्राकृतिक संसाधन को प्रदूषित होने से हमको रोकना होगा वर्ना जल प्रदूषण से होने वाले खतरे मानव सभ्यता के लिए खतरा बन जायेंगे।

जब अवशिष्ट पदार्थों को नदियों, नहरों, तालाबों आदि स्रोतों में बहा दिया जाता है जिससे जल में रहने, वाले जीव-जन्तुओं व पौधों पर तो बुरा प्रभाव पड़ता ही है साथ ही जल पीने योग्य नहीं रहता और प्रदूषित हो जाता है। समय समय पर समुद्रों में होने परमाणु परीक्षणों से जल में नाभिकीय कण मिलते हैं जिससे समुद्री जीव व वनस्पतियां नष्ट हो जाती हैं और इससे समुद्र के पर्यावरण सन्तुलन बिलकुल बिगड़ जाता हैं। साथ ही साथ प्रदूषित जल पीने से मानव में हैजा, पेचिस, क्षय, उदर सम्बन्धी आदि रोग भी उपन्न हो जाते हैं।

वायु प्रदूषण - Air Pollution in Hindi

वायु प्रदूषण रसायनों , सूक्ष्म पदार्थ, या जैविक पदार्थ का भाग है,जो वातावरण में पाया जाता है, जो मानव को या अन्य जीव जंतुओं को या पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुँचाता है।वायु प्रदूषण उत्पन्न होता है, कार्बन ऑक्साइड गैस से जो कि एक प्राकृतिक गैस है जो कोयला या लकड़ी जैसे ईंधन के अधूरे जलने से उत्पन्न होता है। गाड़ियों से होने वाला उत्सर्जन कार्बन ऑक्साइड का एक प्रमुख स्रोत है।

प्रदूषण अपने आप में इतनी बड़ी समस्या है जिसे आसानी से खत्म तो नहीं किया जा सकता परन्तु उसको अपने प्रयासों से दूर किया जा सकता है।

वृक्षारोपण कार्यक्रम - Planting Tree

प्रदूषण को रोकने के लिए वृक्षारोपण कार्यक्रम युद्धस्तर पर चलाना चाहिए। परती भूमि, पहाड़ी क्षेत्र, ढलान क्षेत्र सभी जगह पौधारोपण करना बहुत जरूरी है। जहाँ जहाँ लगातार जंगल कट रहे हैं, वहां वहां पर्यावरण संतुलन तीव्र गति से बिगड़ता जा रहा है और पर्यावरण संतुलन को बनाये रखने के लिए वृक्षारोपण करना बहुत जरुरी है जिससे वायु प्रदूषण को अधिकतम सीमा तक रोका जा सकता है।

प्रदूषण से बचाने के लिए अपने घर के आसपास छोटे पौधें या बड़े वृक्ष लगाएं। प्रकृति के सानिध्य का सुख समझें और आंनद का लाभ उठायें । हम सभी को प्रदूषण से बचाने के लिए और धरती की हरियाली को बचाने का दृढ़ संकल्प लेना चाहिए ।

अपने या बच्चों के जन्मदिन पर या कोई भी आपके जीवन का यादगार क्षण हो , हमको पेड़ लगाकर उन यादों को चिरस्थायी बनाना चाहिए।
प्रकृति ने हमें जीवन निर्वाह करने के लिए अनेक सुंदर उपहार दिये हैं उनमें से पेड़ हमारे लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण उपहार हैं जो प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से हमारे समाज के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
हमें न केवल घर में बल्कि घर से बाहर लगे हुए सभी पेड़ो को खूब पानी देना चाहिए जिससे बह सूखे नहीं और घर और घर के आस –पास का वातावरण शुद्ध रहे।

अनावश्यक पेड़ काटने से पक्षियों का बसेरा खत्म हो गया है,और इस बजह से उनकी बहुत सी प्रजातियाँ खत्म होने के कगार पर हैं , अत:पशु – पक्षियों के जीवन की रक्षा करना हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है ।

कुछ लोग अपने घर के आस पास कचरा जलाते है, जिसमे पॉलीथिन वगैरह ऐसी कई चीजे होती है जिनसे जहरीला धुआं निकलता है जो बीमारियों को जन्म देता है ।इसलिए न केवल हमें इन सब चीजों को रोकना है बल्कि ऐसा करने वालो को भी सही जानकारियां देना है।

कही भी कचरा ना फेके
जब हम लोग कहीं भी कचरा फ़ेंक देतें हैं इससे पर्यावरण में और वातावरण में प्रदूषण फैल जाता है। जल प्रदूषण बढ़ाने में भी कचरा सहायक सिद्ध होता है।जब हम कचरा नदी या तालाब के किनारे पर डाल देते हैं तो बारिश होने पर वह कचरा बह के नदियों – तालाबों में जाता है जिससे जल प्रदूषण बढ़ता है।

ज्यादा शोर ना करे और शोर के प्रदूषण से बचें
अपने घर के पास हम जहा रहते है, वहा हमारे आस – पास कई लोग रहते है ,तो हम अपने घर में ऐसा कोई काम जैसे डीजे या आतिशबाजी ना करे या ज्यादा शोर ना करे जिससे हमको और हमारे आस पास वालो को कोई तकलीफ हो ।कई लोग अपने घरो में बहुत शोर करते है और बोलते है हम तो हमारे घर में करते है लेकिन हमको यह अवश्य ध्यान में रखना हैकि हम हमारे घर में ही नहीं रहते बल्कि हम समाज में रहते है और हमें हमारे घर को ही नहीं बल्कि अपने पूरे परिवार और समाज को प्रदूषण से बचाना है ।

वायु प्रदूषण को रोकने का प्रयास करना चाहिए - How to Prevent Air Pollution in Hindi

वायु प्रदूषण से बचने के लिए निजी वाहनों की संख्या को कम करना चाहिए |

सार्वजनिक वाहन प्रणाली की समुचित सुविधाए होनी चाहिए |पेट्रोल , डीजल के स्थान पर सौर ,जल ,गैस (जैसे CNG , LPG) एवं विद्युत उर्जा से चलने वाले वाहनों का अविष्कार एवं उत्पादन करना चाहिए |सीसा रहित पेट्रोल का उपयोग करना चाहिए |वाहनों की उम्र निर्धारित करना चाहिए |कार्यालयों , निजी संस्थानों द्वाकरनारा अनुबंधित बसों का उपयोग करना ताकि स्कूटर , मोटरसाइकिल ,स्वचालित बाइको का प्रयोग कम हो |

लोगो में पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करना

पर्यावरण का सीधा सम्बन्ध प्रकृति से है। हम अपने घर के आस – पास बिभिन्न प्रकार के जीव – जंतु ,पेड़ – पौधे तथा अन्य तरह की सजीव एव निर्जीव वस्तुओं को पाते हैं और यह सब मिलकर पर्यावरण की रचना करते हैं । पर्यावरण के प्रति भी हमे लोगो को समझाना होगा कि वह कैसे अपनी प्रकृति को सहेज कर रख सकते हैं ।पानी को बचाने के लिए खाना बनाते वक्त सब्जियों को धोने में जिस पानी का प्रयोग करते हैं ,उस पानी से पोधों का सरक्षण करना है ।

पालीथीन से प्रदूषण फैलता है, अत: पालीथीन का हम सभी को उपयोग नहीं करना चाहिए बल्कि रद्दी पेपर से बनी हुई थेलियों का उपयोग करना चाहिए ।इसके साथ – साथ हमें रद्दी पेपर और कपड़े से बने हुए थैलौ का प्रयोग करना है |कम पोधों को लगायें लेकिन उनकी देखभाल भली भाति करें क्योंकि पौधे ही हमारे वातावरण को शुद्ध रख सकते हैं |

आप को और हमारे समाज और खास कर हमे अपनी आने वाली पीढ़ी को प्रदूषण से बचाना है, किसी भी प्रकार का पदूषण हो उसे रोकने के लिए हमे एक साथ मिल कर कदम उठाना चाहिए|

सरकार के प्रयत्न करने के साथ-साथ हमें भी सरकार के साथ रह कर प्रदूषण को दूर करना है |यह किसी एक इंसान की समस्या नहीं है,बल्कि पूरी मानव जाति की समस्या है जिससे सब को मिलके निपटना होगा तभी हम प्रदूषण से बच सकते हैं|

और अंत में

प्रकृति हमें जीने की कला सिखाती ,हरे भरे जीवन के आंगन में हमको प्रेम से बिठलाती |

भू पर नीचे जल बरसाती ,लहरों का भरपूर शोर सुनाती |

बारिश में मोरों को नचाती , साथ में चार युगों का सफर कराती|

नदियों की कलकल सुनवाती , मौसम की हलचल बतलाती |

नदियों के बहाव को रुकाती ,ऋषियों के संसार बसाती ,

जीवन को खुशमय बनाती, धरा पर सुख शांति सजाती |

और हमारे वेदों के अनुसार “धरती हमें मां के समान सुविधा एवं सुरक्षा देती है। अतः धरती मेरी मां है और मैं उसका पुत्र हूं।”
~अथर्ववेद

“अग्नि, वायु, जल, आकाश, पृथ्वी, सूर्य, चंद्रमा, औषधि एवं वनस्पति आदि सब देवता हैं। जो प्रत्युपकार की इच्छा के बिना सदा हमारी सहायता कर रहे हैं, वह देवता होते है। इन सभी देवताओं के साथ हमें भावनात्मक संबंध रखना चाहिए।"

~यजुर्वेद

“इस ब्रह्मांड में प्रकृति सबसे शक्तिशाली है, क्योंकि यही सृजन एवं विकास और यही ह्रास तथा नाश करती है। अतः प्रकृति के विरुद्ध आचरण नहीं करना चाहिए।”
~ऋग्वेद

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