कामकाजी महिलाओं के लिए टिप्स || Health Tips for Working Women in Hindi

आज के समय में अधिकतर महिलायें दो ज़िम्मेदारियों निभाती हुई दिखती हैं - पहली घर की और दूसरी दफ्तर की।

भले ही घर के काम में सहायता करने के लिए उनके पास कोई डोमेस्टिक हेल्प हो, पर फिर भी उसको देखना, मैनेज करना, एक तरह से ये पूरी तरह स्त्री का ही कार्य रहता है।

(ऐसा क्यों है, इसके पीछे क्या सोशल कंडीशनिंग कार्य करती है, इसके कारणों में हम नहीं जा रहे, पर ऐसा है, ये हमें स्वीकार करना होगा)।

फिर ऑफिस में भी अपने काम को बखूबी कर पाना- इसका भी प्रेशर रहता ही है। तो ये दो दो ज़िम्मेदारियाँ निभाते हुए स्त्री के मन के साथ उसके तन पर भी प्रभाव आता है।

आज कामकाजी महिलाओं में स्ट्रेस, एंग्जायटी, पाचन सम्बन्धी रोग- कितनी ही बीमारियां बढ़ती जा रही हैं।

आयुर्वेद - भारत का सदियों पुराना चिकित्सा विज्ञान है और ये स्वास्थ्य को बनाये रखने के विविध आयामों पर चर्चा करता है।

स्त्रियों के लिए भी आयुर्वेद में ऐसी अनेक चीज़ें कही गयीं हैं जिन्हें रोज़मर्रा के जीवन में अपनाने से वे बेहतर स्वास्थ्य प्राप्त कर सकती हैं। आज कुछ ऐसी ही टिप्स पर विचार करते हैं।

1. अपने स्वास्थ्य की ज़िम्मेदारी लें

अनेक कामकाजी महिलायें ये मान लेती हैं कि अब कुछ नहीं हो सकता! हमारा स्वास्थ्य खराब है और हमारे पास इसके लिए समय नहीं है। सबसे पहले इस सोच को ही बदलना होगा।

'मेरा स्वास्थ्य मेरे हाथ में है'! मैं इसके लिए हर संभव प्रयास करूंगी! - इस तरह के विचार स्वयं को देने होंगे। संकल्प में बहुत शक्ति है। मनुष्य के मन में बहुत शक्ति है।

तो अपने मन की शक्ति का प्रयोग करें और पहले मन से तो मानें कि आप अपने जीवन में स्वयं परिवर्तन ला सकती हैं।

2. आयुर्वेदिक मसाज का सहारा लें

मसाज जिसे संस्कृत में अभ्यंग कहा जाता है- शरीर की पुष्टि के लिए अति महत्वपूर्ण है। जो स्त्रियां माँ हैं, वे जानती हैं कि किस प्रकार डिलीवरी के बाद पुराने समय में कम से कम तीन महीने स्त्री को मसाज के लिए कहा जाता था।

तो ये मसाज केवल उसी समय के लिए नहीं, पर आयुर्वेद में तो ये दिनचर्या का हिस्सा है।

आज समय की कमी के कारण आप रोज़ भले ही ना कर पाएं, तो हर तीसरे दिन करें, या हर हफ्ते करें। रोज़ कर पाएं, तो इससे बेहतर कुछ नहीं!

कैसे करें मसाज

मसाज के लिए आप सर्दियों में तिल का तेल व् गर्मियों में नारियल के तेल इस्तेमाल कर सकते हैं। हाथ में थोड़ा सा तेल लें, दोनों पैरों की अच्छी तरह कम से कम पांच मिनट मालिश करें। पैर के पंजे, तलुए, अंगुलियां आदि सभी हिस्सों की मालिश करें।

मालिश के लिए मुरिवंना ऑइल का प्रयोग भी कर सकते हैं।

मालिश करते हुए अपने हाथों व् पैरों को अच्छी वाइब्रेशंस दें। मन का प्रभाव तन पर होता ही है। हमारे हाथ, पैर व सभी अंग हमारा कितना सहयोग करते हैं। तो प्यार से, अच्छी भावनाओं के साथ इनकी मसाज करें।

हम समझते हैं कि मंदिर जाने का मतलब धर्म होता है। मंदिर जाना अच्छी बात है, पर यह शरीर रुपी मंदिर जिसमें आप परमेश्वर रहता है, इसे प्यार से देखना, इसकी केयर करना, यह किसी धर्म से कम नहीं! तो रोज़ अपने शरीर रुपी मंदिर की मालिश करें।

3. रोज़ प्राणायाम व् ध्यान करें

कम से कम १० - १५ मिनट शांत बैठना, मन को आराम देना ज़रूरी है। यही ध्यान है। कोई भी रिलैक्सिंग सूदिंग सा म्यूज़िक लगाएं और श्वास को गहरा रखें। चाहें तो ॐ का लम्बा उच्चारण भी कर सकते हैं। इस प्रकार का एक नियम अपने जीवन में लाएं।

4. आयुर्वेद का लें सहारा

आयुर्वेद में महिलाओं के लिए कुछ ख़ास औषधियां (herbs) बतायी गयीं हैं। थोड़ा उनके विषय में जानते हैं।

i) शतावर

शतावर एक अद्भुत औषधि है। रोज़ दूध के साथ एक चम्मच शतावर का पाउडर आप लें। अपने स्वास्थ्य में एक अद्भुत बदलाव आप पाएंगी।

ii) अर्जुन का चूर्ण

आज ह्रदय रोग की समस्या बहुत बढ़ रही है। यदि नियमित रूप से अर्जुन चूर्ण का उपयोग किया जाए, तो इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है।

iii) ब्राह्मी

अच्छे मस्तिष्क के लिए ब्राह्मी का उपयोग भारत में सदियों से होता आया है। ब्राह्मी को अपने जीवन में शामिल करें। इसके चूर्ण या टेबलेट्स को दूध के साथ लिया जा सकता है।

iv) तुलसी

तुलसी की भारत में सदा से ही पूजा होती आयी है। इस छोटे से पौधें में कितने गुण हैं, ये आज के वैज्ञानिक शोधों से पुख्ता हो रहे हैं। रोज़ तुलसी के पत्ते खाली पेट पानी के साथ निगलने से अनेक छोटे मोठे रोगों से बचा जा सकता है। आजकल तो आसान विकल्प में टेबलेट्स भी उपलब्ध हैं। एक सावधानी ज़रूर रखनी है, तुलसी खाने से दो घंटा पूर्व और दो घंटे बाद तक दूध ना लें।

इसके अतिरिक्त रोज़ के भोजन में आंवला, नींबू, अदरक आदि का प्रयोग अवश्य करें।

5. मन को शांत रखें

जीवन को अच्छा बनाने के हरसंभव उपाय करें, पर साथ ही साथ ये निश्चय भी रखें कि जीवन है तो उतार चढ़ाव भी आएंगे ही। सब चीज़ें हमारे मन के अनुसार हों, ज़रूरी नहीं! तो थोड़ा आध्यात्मिक ज्ञान का, योग का, भगवद्गीता का सहारा भी लें। अपने मन को शांत रखना हमें खुद ही सीखना होगा।

अपने अच्छे स्वास्थ्य के लिए ये टिप्स अपनाएँ व् जीवन को और अधिक सुखद बनाएं।

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