कहीं आपको भी तो नहीं Dry Eye सिंड्रोम, यहां जाने इससे निजात पाने के उपाय | What is Dry Eye syndrome, know how to get rid of it in hindi

ड्राई आई सिंड्रोम के बारे में कुछ भी बात करने से पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर यह होता है. यह किस तरह से हमारी आंखों को प्रभावित करता है? इसके लक्ष्ण क्या हैं? और इससे बचाव के क्या तरीके हैं. तो चलिए बिना कोई देरी किए आपको बताते हैं कि आखिर ड्राई आई सिंड्रोम है क्या?

क्या है ड्राई आई सिंड्रोम | What is Dry Eye Syndrome

वक्त बदल रहा है और इस बदलते वक्त के साथ काम करने का तरीका भी बदल रहा है. आजकल कंप्यूटर पर काम करने का ज़माना है, जिसके चलते ड्राई आई सिंड्रोम की समस्याएं भी बढ़ती जा रही है. ड्राई आई सिंड्रोम में या तो आंखों में आंसू बनना कम हो जाते हैं या फिर उनकी गुणवत्ता अच्छी नहीं रहती. दरअसल आंसू, आंख के कॉर्निया और कन्जंक्टाइवा को नम और गीला रखकर उसे सूखने से बचाते हैं.

वहीं हमारी आंखों में एक टीयर फिल्म होती है. इसकी सबसे बाहरी परत को लिपिड या ऑयली लेयर कहते हैं. यही लिपिड लेयर आंसू के ज्यादा बहने, गर्मी और हवा में आंसू के सूखने या उड़ने को कम करती है. यही लिपिड या फिर ऑयली लेयर आंखों की पलकों को नमी देती है, जिससे पलकों को झपकाने में आसानी रहती है. लेकिन बहुत देर तक कंप्यूटर पर काम करने या बहुत ज्यादा टीवी देखने या फिर लगातार एयरकंडीशन में रहने से आंखों की टीयर फिल्म पर नकारात्मक प्रभाव होता है और आंखें सूखने लगती हैं. इसे ही ड्राई आई सिंड्रोम कहा जाता है.

वहीं दूसरी ओर लोग सर्दी के वक्त भी ठंड से बचने के लिए मोटे-मोटे गर्म कपड़ों का सहारा तो ले लेते हैं, लेकिन आंखों पर ध्यान नहीं देते. ठंड में आंखें हमेशा बिना ढकी रहती हैं, जिस कारण सर्दियों में आंखों में ड्राई आई सिंड्रोम का खतरा चार गुणा तक बढ़ जाता है.

ड्राई आई सिंड्रोम के कारण | Reasons For Dry Eye Syndrome

ड्राई आई सिंड्रोम वैसे कई कारणों से हो सकता है लेकिन उनमें से मुख्य कुछ कारण हम अपने इस आर्टिकल में आपको बताने वाले हैं. तो बिना कोई देरी किए आप नीचे दिए गए प्वाइंट्स को पढ़ें और ध्यान रखें कहीं जाने अनजाने आप भी तो ड्राई आई सिंड्रोम से पीड़ित तो नहीं है.

50 वर्ष से अधिक आयु

उम्र बढ़ने के साथ आंसू के उत्पादन में भी कमी आने लगती है. इसलिए 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में कई बार आंसुओं का उत्पादन घट जाता है. जिस कारण उनमें ड्राई आई सिंड्रोम होने की संभावना अधिक रहती है.

मेनोपॉज (Menopause)

महिलाओं में आमतौर पर यह समस्या देखी जाती है, विशेष रूप से मेनोपॉज के बाद महिलाओं में इसकी संभावना बढ़ जाती है. इसका कारण हार्मोनल चेंज भी हो सकता है.

स्वास्थ्य संबंधी समस्या

किसी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या, जैसे मधुमेह, संधिशोथ, ल्यूपस, स्क्लेरोडर्मा, स्जोग्रेन्स सिंड्रोम, थायराइड विकार या विटामिन ए की कमी आदि के कारण भी ड्राई आई सिंड्रोम होने का खतरा बढ़ जाता है.

लेजर नेत्र शल्य चिकित्सा के कारण

रिफरेक्टिव आई सर्जरी जैसे, लेज़र-असिस्टेड इन-सीटू केटमिलेउसिस (LASIK) आदि आंसू के उत्पादन में कमी और सूखी आंखों का कारण हो सकते हैं. हालांकि, इन प्रक्रियाओं से संबंधित ड्राई आई के लक्षण आमतौर पर अस्थायी होते हैं.

आंसू ग्रंथि क्षति के कारण

सूजन या विकिरण से आंसू ग्रंथियों को पहुंचा किसी प्रकार का नुकसान, आंसू उत्पादन को प्रभावित कर सकता है. जिसके चलते आंसुओं के उत्पादन में कमी आ सकती है और आप इस समस्या से पीड़ित हो सकते हैं.

पलक संबंधी समस्याएं

लगातार पलकें झपकाते रहने से आंखों की सतह आंसू की एक सतत पतली फिल्म बनती है. यदि आपको कोई पलक झपकाने में कोई समस्या है तो आंसू ठीक तरीके से फैल कर आंख के भीतर सतत पतली फिल्म नहीं बना पाता है, और तेजी से लुप्त हो सकता है. जिस कारण ड्राई आई की समस्या हो सकती है.

ड्राई आई सिंड्रोम से बचाव 

अब जब आप जान गए हैं कि ड्राई आई की समस्या किन कारणों से हो सकती है तो चलिए बिना कोई देरी करे आपको यह भी बता दें कि आप इससे खुद को कैसे बचा सकते हैं.

- चिकित्सकों के मुताबिक आंखों में कोई समस्या हो या न हो लेकिन फिर भी समय-समय पर आंखों की जांच कराते रहना चाहिए.

- लगातार टीवी देखने या कम्प्यूटर पर काम करने से भी बचें. इससे आंखों पर काफी दबाव पड़ता है और आंखें कमजोर होती हैं.

- काम के बीच-बीच में पलकों को भी झपकाते रहना चाहिए. पलकों को झपकाने से आंख की पुतली के ऊपर आंसू फैलते हैं, जिससे उनमें नमी बनी रहती है और वे सूखेपन से बच जाती हैं.

- घर से बाहर निकलते समय अच्छी क्वॉलिटी का चश्मा पहनकर निकलें. इससे आप धूल, धूप और हवा आदि से बचे रहेंगे. साथ ही थोड़ी-थोड़ी देर पर आंखों में ताज़े पानी के छीटे भी मारते रहें. इससे आंखों को आराम मिलता है. - खाने में हरी साग-सब्जियां, मौसमी फल और दूध आदि को शामिल करें. इससे आंखों में होने वाली तमाम तरह की समस्याओं से छुटकारा मिलता है और आंखों की रोशनी बढ़ती है.

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