पढ़ें ब्रह्माकुमारी सिस्टर शिवानी के जीवन बदल देने वाले 35 अनमोल विचार | Brahma Kumari sister Shivani’s 35 Quotes in Hindi

ब्रह्माकुमारी शिवानी वर्मा को लोग सिस्टर शिवानी के नाम से भी जानते हैं। सिस्टर शिवानी एक आध्यात्मिक संस्था प्रजापति ब्रह्मा कुमारी विश्वविद्यालय से जुड़ी हुई हैं। सिस्टर शिवानी साल 2008 से टीवी पर आने वाले आस्था चैनल से जुड़ी हुई हैं जिस पर उनका अवेकिंग विद ब्रह्मा कुमारी नाम से कार्यक्रम प्रसारित होता है। वह इस माध्यम से कई लोगों को आध्यात्मिक प्रवचन देती हैं, जो लोगों को आध्यात्म से जुड़ कर मानव कल्याण के लिए प्रेरित करता है।

केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में कई संस्थाओं द्वारा भी ब्रह्मा कुमारी शिवानी को आध्यात्मिक प्रवचन के लिए बुलाया जाता है। आपको बता दें, ब्रह्मा कुमारी शिवानी का जन्म 1972 में पुणे में हुआ है. उन्होंने 1994 में पुणे यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की है। जिसके बाद उन्होंने दो सालों तक भारतीय विद्यापीठ इंजीनियरिंग कॉलेज में बतौर लेक्चरर पढ़ाया है।

बता दें, ब्रह्म कुमारी शिवानी को वीमेन ऑफ द डिकेड अचीवर अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है और आज हम आपके लिए ब्रह्म कुमारी शिवानी के कुछ अनमोल वचनों को अपने इस आर्टिकल में बताने जा रहे हैं जिन्हें पढ़ आप भी काफी अच्छा और जीवन के प्रति काफी सकारात्मक महसूस कर पाएंगे।

1. लोगों की ईर्ष्या आपकी सफलता को नहीं रोक सकती।

अगर आप उनकी वाइब्रेशन से डरते हैं...
अगर आप उनसे परेशान होते हैं...
तो आप उनकी वाइब्रेशन में उलझ जाते हैं, और तब
उनकी वाइब्रेशन आपकी सोच पर प्रभाव डालती है।

अपनी सोच में विश्वास और उनके प्रति सहानुभूति रखें,
आपकी सोच आपकी सफलता और भाग्य बनाती है।

2. धन औरों का ध्यान रखते हुए कमाया जाए- जिसमें अपने से पहले दूसरों का फायदा हो,
औरों को सुख और खुशी देते हुए आया धन, घर में दुआएं लेकर आता है।

हाई वाइब्रेशन धन को लक्ष्मी कहते हैं।

जैसा धन वैसा अन्न, जैसा अन्न वैसा मन, जैसा मन वैसा तन,
दुआओं से आया धन- खुशी, सेहत और घर में बरकत लाता है।

3. रिश्तों में हम उनके लिए, वह हमारे लिए सम्मान, विश्वास, प्यार, दुआएं महसूस करते हैं।
प्योर वाइब्रेशन्स उन्हें भेजकर और उनसे पाकर, हमारी आंतरिक शक्ति बढ़ती है।

धन से हम बाहर भरपूर होते हैं, रिश्तों से हम अंद भरपूर होते हैं।

धन के लिए अगर रिश्ते बिगड़ जाते हैं, तो शायद हम बाहर भरपूर लेकिन अंदर खाली हो जाते हैं।

4. शुक्रिया उनका जो हमें सम्मान देते हैं, लेकिन जो हमसे सही व्यवहार नहीं करते-

आपका बहुत बहुत शुक्रिया...

आप न आते, तो हम झुकते नहीं, हम झुकते नहीं, तो हमारा अंहकार घटता नहीं,
अहंकार घटा, तो हमने सही कर्म किए, सही कर्म ने हमारा श्रेष्ठ भाग्या बनाया,

आपने हमारा भाग्य बिगाड़ा नहीं, संवारा है.

5. कभी मन कहता है-
इनसे बात नहीं करनी, यह बात कभी नहीं भूलेगी।

कभी मन कहता है-
कोई बात नहीं, छोड़ दो, हम तो सही करें।

मन कभी सही सोचता है, कभी गलत, क्योंकि आत्मा में प्यार का संस्कार है और नफरत का भी।

जिस संस्कार को ज्यादा इस्तेमाल करेंगे, स्वभाव बनता जाएगा।

6. जीवन में मुश्किल आई, भगवान पर, देवी देवताओं पर, लोगों पर, किसी की नजर पर, प्रकृति पर, ग्रहों पर... किसी पर दोष न लगाएं.

औरों को जिम्मेवार ठहराने से हम अपनी जिम्मेदारी भूल जाते हैं।

सोच, बोल, कर्म बदलें... भाग्य खुद बदल जाएगा।

7. कलयुग के दुख और अशांति की रात में,
निराकार परमात्मा शिव अवतरित हो कर,
हमें अज्ञान की नींद से जागरण करवाते हैं।

हम शिव परमात्मा पर अपनी कमजोरियों के आक के फूल और धतूरा चढ़ाते हैं।

परमात्मा शिव रात्रि में आकर, सृष्टि पर सतयुगी सवेरा लाते हैं।

8. जब हम अपना काम करते हैं, या हम किसी के लिए कुछ करते हैं,
हमें सही लगता है इसलिए करते हैं, हमें अच्छा लगता है इसलिए करते हैं।

फिर प्रशंसा की अपेक्षा क्यों रखते हैं?
ना मिलने पर दुखी क्यों होते हैं?
निंदा मिलने पर नाराज क्यों होते हैं?

9. सुबह सुबह किसका चेहरा देखा था, आज दिन अच्छा नहीं बीता?

चेहरा देखना मतलब- सुबह मन ने सब से पहले किसे याद किया।
परिवार को गुड मॉर्निंग करने से पहले, सोशल मीडिया पर गुड मॉर्निंग करने से पहले, सबसे पहले परमात्मा को नमन करें।

10. लोगों से बात कर के मन हल्का हो जाता है...

हमारी प्रोब्लम सुनकर, अगर उन्हें चिंता, निराशा, डर या दुखा हुआ,
उन्होंने हमारी या दूसरों की निंदा की, तो उनकी वाइब्रेशन हमें भारी कर देंगी।

बात उनसे करें जो हर प्रोब्लम में स्थिर रहें, सही सोचें, सबका नजरिया समझें।
हमें सिर्फ समाधान नहीं, शक्लि भी मिले।

11. किसी समस्या से परेशान हैं, कोई गलत आदत छोड़नी है,
हम परमात्मा को कहते हैं- हे भगवान मेरी इस प्रोब्लम को ठीक कर दो

भगवान प्रोब्लम नहीं ठीक करता, प्रोब्लम तो हमारे कर्मों का हिसाब किताब है।

Meditation में परमात्मा से Connect करें, उसके ज्ञान और शक्ति को अपने अंदर भरें,
शक्तिशाली हो कर अपनी समस्या का समाधान करें।

12. जिन लोगों से हमें काम करवाना है, उन्हें समझाएं, डिसिप्लिन करें, लेकिन
सम्मान से, अपमान करके नहीं, शांति से, आवाज ऊंची करके नहीं,
विशेषताएं देखकर, निंदा करके नहीं।

सम्मान और प्यार से उनकी क्षमता बढ़ेगी, क्षमता से काम करने का तरीका बदलेगा।

प्यार से समझाएं... खुद भी दुआएं कमाएं।

13. आज कल हम फोन सिर्फ सुबह चार्ज नहीं करते, दिन में भी बीच-बीच में चार्ज कर लेते हैं,
ताकि जरूरत पड़ने पर फोन हमेशा चार्ज हो। पावर बैंक हमेशा साथ रखते हैं।

मन को सारा दिन सही तरह चलने के लिए, मन को सुबह Meditaition कर चार्ज करें।
हर घंटे बाद 1 मिनट के लिए चार्ज करें।

Supreme Power Bank परमात्मा को अपने साथ रखे, मन हमेशा चार्ज्ड रहेगा।

14. जैसा संग वैसा रंग

रंग सिर्फ मिलने या बातों से नहीं, जिन्हें हम याद करते हैं, उनके वाइब्रेशन्स का रंग लगता है।

सतसंग- सत्य परमात्मा का संग
परमात्मा की याद से उनकी शांति, शक्ति, पवित्रता और प्यार का रंग लग जाएगा।

15. सोच समझकर बोलें

हम पहले बोल देते हैं- फिर समझते हैं गलती हो गई...
फिर सोचते रहते हैं- क्यों बोला?

सोच समझकर बोलो, बोल कभी गलत नहीं निकलेंगे।

16. हम अपना काम करते हैं, हमें सही लगता है इसलिए करते हैं।
हम किसी के लिए कुछ करते हैं, हमें अच्छा लगता है इसलिए करते हैं।

फिर प्रशंसा की अपेक्षा क्यों रखते हैं?
ना मिलने पर दुखी क्यों होते हैं?
निंदा मिलने पर नारा क्यों होते हैं?

17. सारा दिन में आप कितने लोगों से पूछते हैं- क्या हाल चाल है?, आप कैसे हैं? आपको कुछ चाहिए?

आज से एक नया रिश्ता जोड़ते हैं।
हर 1 घंटे बाद, 1 मिनट के लिए, अपने मन से पूछें- आप ठीक हैं
अगर ठीक न लगे तो उससे प्यार से बात करेत उसको ठीक कर लें।

18. दही खट्टी है, उससे अगर दही जमाएंगे, तो अगले दिन भी खट्टी दही खाएंगे,
नहीं बदली, तो जीवनभर खट्टी दही खाएंगे।

किसी के प्रति नाराजगी, पुरानी बात पकड़े रहना और सोच नहीं बदली तो जीवन भर खट्टे रिश्ते पाएंगे।
बात छोटी थी या बड़ी, एक सही सोच, रिश्तों में मिठास भर देती है।

19. कहते हैं, खाली हाथ आए थे, खाली हाथ जाएंगे।

सच तो यह है, सब कुछ जो दिखता है-
शरीर, रिश्ते, धन-संपत्ति, नाम और औधा...
ना लेकर आए थे ना लेकर जाएंगे।

संस्कार और कर्म, जो दिखते नहीं हैं,
साथ लेकर आए थे और साथ लेकर जाएंगे।

जो साथ नहीं जाएगा, उसके लिए इतनी मेहनत करते हैं,
जो साथ जाएगा उनका भी ध्यान रख लें...

20. फोन पर मैसेज आया, हमने देख लिया,
फिर कहा, अच्छा नहीं है, डिलीट कर देते हैं,
मैसेज फोन से मिटा दिया, लेकिन मन में तो छप गया, वहां से कैसे डिलीट करें?

मैसेज को परखें, जो मैसेज पॉजिटिव नहीं लगे, उन्हें ना देखें, न औरों को फॉरवर्ड करें। मैसेज को देखे या पढ़े बिना डिलीट कर दें।

जो आप देखते, पढ़ते या सुनते हैं, आप वही बनते हैं।

21. रिश्तों में झुकना कमजोरी है या शक्ति है?

मौसम बदले और हम बीमार न पड़ें,
यह शक्ति है या कमजोरी है?
लोगों के गलत व्यवहार का प्रभाव हम पर नहीं पड़े,
यह शक्ति है या कमजोरी है?
हम हमेशा सही, सम्मान और प्रेम से व्यवहार करें,
यह शक्ति है या कमजोरी है?

दुनिया भले हमें कमजोर समझे
हमें मालूम है शक्ति क्या है और कमजोरी क्या है।

22. सिमर सिमर सुख पाओ...

हम जिनको याद करते हैं, हमारे मन की स्थिति उनके मन की स्थिति से कनेक्ट हो जाती है।
कोई परेशान, उदास या नाराज है, उन्हें याद करेंगे तो उन जैसा महसूस करेंगे।

सर्वशक्तिमान परमात्मा को याद करेंगे तो, शांति, प्यार और शक्तियों से भरपूर होंगे।
जिन्हें याद करेंगे उन जैसा बन जाएंगे।

23. बच्चों की गलतियां देखकर हम कह देते हैं-
यह हमेशा ऐसे ही करते हैं, यह इनकी आदत है, कितना समझाओ, इनकी आदत नहीं बदलती

अपनी सोच और बोल को आशीर्वाद बनाएं-
आप जो चाहोगे, वह कर सकते हो, यह आदत बदलना तो बहुत आसान है।

24. पुरानी बात को मन पर रखना, बात बीत गई, घाव नहीं भरा।
बात को सोचने से, बोलने से, सुनने से, दर्द बढ़ता है, भूलना मुश्किल होता है।

बोलना और सुनना आज से बंद करते हैं।
सोच को खत्म करने के लिए रोज संकल्प करें-
कर्मों का हिसाब किताब था, पूरा हुआ, उनके लिए सिर्फ प्यार और दुआएं।

25. हम लोगों से प्यार से बात करते हैं, लेकिन कभी कभी हमारी सोच उतनी प्यारी नहीं होती।
रिश्ते बोल और व्यवहार से नहीं, हमारी सोच से बनते हैं।

ध्यान से सोचिए, आपकी हर सोच उन तक पहुंच रही है।

26. लोगों का व्यवहार हमारा भाग्य नहीं बिगाड़ सकता।
उनका व्यवहार, उनका कर्म है, उससे उनका भाग्य बनता है।

हम उनके बारे में क्या सोचते हैं, उनसे कैसा व्यवहार करते हैं,
वह हमारा कर्म है। उससे हमारा भाग्य बनता है।

27. आपने मेरा अपमान किया, मुझे दुख दिया,
हम अपेक्षा रखते हैं, वह माफी मांगे और वह बदलें।
यह हो भी सकता है और नहीं भी।

लेकिन एक चीज जरूर हो सकती है, हम खुद से अच्छी बातें करें।
उनका व्यवहार, उनके संस्कार हैं, उसका मुझ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

28. 2 लोगों का रिश्ता, सोच से बनता है।
एक दूसरे की कमजोरियों का चिंतन करें, तो नेगेटिव वाइब्स दूसरे को पहुंचती हैं,
दूसरा भी नेगेटिव सोचना शुरू कर देता है, रिश्ते में गांठें पड़ जाती हैं।

कितनी भी पुरानी गांठें हों, सिर्फ एक बदले, अच्छा सोचें, रिश्ता सुंदर बन जाएगा।

29. सोच कुछ और, बोल कुछ और

बोल- मैं जरूर आऊंगा
सोच- मैंने नहीं जाना

बोल- खाना बहुत अच्छा बना है,
सोच- बिल्कुल स्वाद नहीं है

अगर कोई बात बोलने लायक नहीं, तो वह सोचने लायक भी नहीं है।
सोच को बदलें, बोल को नहीं, रिश्ते बोल से नहीं, सोच से बनते हैं।

30. कुछ लोगों को हम माफ नहीं करते और उनसे बात भी नहीं करते, लेकिन,
अगर उनकी गलती हमें याद रहती है, हम उनके बारे में सोचते हैं, उनके बारे में औरों से बात करते हैं,
तो हम उन्हें ही याद कर रहे हैं।
एक दूसरे से नेगेटिव एनर्जी से जुड़े हुए हैं।

माफ कर देने का मतलब होता है कि आप उनके बारे में अब कुछ नहीं सोचेंगे।

31. आग लगती है तो यह नहीं पूछते कैसे लगी।
बात छोटी हो या समस्या बड़ी हो, क्यों हुआ, कैसे हुआ, किसकी वजह से हुआ?
प्रश्नों का चिंतन मन की शक्ति घटाता है।
कारण नहीं ढूंढना, निवारण ढूंढना है-
अब मुझे कैसे सोचना है, मुझे क्या करना है, समस्या स्वरूप नहीं, समाधान स्वरूप बनना है।

32. जब किसी के साथ रिश्ते में गांठ पढ़ जाए, तो उनके बारे में औरों से बात नहीं,
लेकिन खुद उनसे बात करें।
जितने लोगों से हम बात करते हैं, उतना हर एक की भाव भावनाएं, बात को उलझा देती हैं।

33. कोई हमसे गलत व्यवहार करे, हम प्यार से बात करें।
वो फिर गलत व्यवहार करे, हम फिर प्यार से बात करें।
वह अपने संस्कार वश है, हम अपने।
हमारा व्यवहार उनके व्यवहार पर निर्भर नहीं, हमारा व्यवहार हमारे संस्कारों पर निर्भर करता है।

34. बड़े हो कर इसका क्या होगा, अगर मुझे कुछ हो गया तो, चिंता करना स्वाभाविक है,
चिंता में हम भविष्य का एक चित्र बनाते हैं और वर्तमान में उस चित्र को देख डरते रहते हैं।

चिंता को ज्ञान के आधार से चिंतन में बदलें, रोज सुबह ध्यान करें, फिर सबका ध्यान रखेंगे, चिंता नहीं करेंगे।

35. लोग हमारे अनुसार होंगे, तो हम खुश होंगे, हम उनके अनुसार होंगे, तो वह खुश होंगे,
एक दूसरे की अपेक्षाओं को पूरा करना, जब जीवन जीने का तरीका बन जाए, तो खुश रहना मुश्किल हो जाता है।
वह अपने अनुसार होंगे और हम अपने, एक दूसरे की भिन्नता को स्वीकार कर लें तो खुश रहना सहज और स्वाभाविक हो जाएगा।

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